शब्द का अर्थ
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क्रांत :
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वि० [सं०√क्रम (गति)+क्त] १. जिसके उपर से होकर अथवा जिसे लाँघ कर कोई गया हो। लाँघा या पार किया हुआ। २. जिससे आगे कोई दूसरा बढ़ गया हो। ३. जिसे किसी ने अभिभूत या वश में कर लिया हो। दबाया या दबोचा हुआ। पं० १. पैर। २. घोड़ा। |
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समानार्थी शब्द-
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क्रांतदर्शी (र्शिन्) :
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पुं० [सं० क्रांत√दृश् (देखना)+णिनि] १. त्रिकाल दर्शी। २. ईश्वर। परमेश्वर। |
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क्रांति :
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स्त्री० [सं०√क्रम्+क्तिन्] १. किसी को लाँगकर अथवा किसी को अभिभूत करके उससे आगे बढ़ने या उस पर विजय प्राप्त करने की क्रिय़ा या भाव। २. राजनीति में वह स्थिति जिसमें विद्रोहियों ने सफलतापूर्वक शासन की बागडोर अपने हाथों में लेली हो। राज्यक्रांति। ३. कोई ऐसा बहुत बड़ा परिवर्तन जिससे किसी चीज का स्वरूप बिलकुल बदल जाय। जैसे—औद्योगिक क्रांति। (रिवोल्यूशन-उक्त दो अर्थों में) ४. पृथ्वी के चारों ओर सूर्य के घूमने का मार्ग। ५. नक्षत्रों की पारस्परिक दूरी। |
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क्रांति-कक्ष :
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पुं० =क्रांति-वृत्त। |
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क्रांति-क्षेत्र :
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पुं० [ष० त०] गणित में वह क्षेत्र जो ग्रहों की क्रांति निकालने के लिए बनाया जाता है। |
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क्रांति-पात :
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पुं० [ष० त०] वे बिन्दु जिन पर क्रांति वलय और खगोलीय विषुवत की रेखाएँ एक दूसरे को काटती हैं। |
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क्रांति-भाग :
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पुं० [ष० त०] खगोलीय नाड़ी-मंडल से क्रांति-मंडल के किसी बिन्दु की दूरी। |
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क्रांति-मंडल :
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पुं० [ष० त०]=क्रांति-वृत्त। |
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क्रांति-वलय :
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पुं० =क्रांति-वृत्त। |
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क्रांति-साम्य :
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पुं० [ष० त०] ग्रहों की क्रांति में होनेवाला साम्य (ज्योति)। |
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क्रांतिज्या :
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स्त्री०=दे० ‘ज्या’। |
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क्रांतिवादी (दिन्) :
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पुं० [सं० क्रांति√वद् (बोलना)+णिनि] वह जो किसी अथवा किसी सम्यक् व्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन करना चाहता हो। |
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